लेखनी कविता -10-Feb-2022 (सर्दी की बारिश और चाय)

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सर्दी की बारिश ने यह कैसा  हमको पैग़ाम दिया । उठा जाए ना बिस्तर से हमसे ऐसा जुक़ाम दिया ।। गले मे खरास थी और स्वाश नली हो गई थी बन्द ...

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